
रात का समय
दुनिया सो रही होगी
सोच रहा मैं
अचानक गुल हुई बिजली
पहुंचा छत पर लिए बिस्तर
लेट गया खुले आसमान की ओर मुह किये
चारों ओर सन्नाटा
और उसको तोड़ते हुए
कुत्तों और सियारों की आवाज
शायद आपस में अन्ताक्षरी खेल रहे हैं
सोचता मैं
फिर ख़याल आता अपने अस्तित्व का
उन टिमटिमाते तारों को देख कर
मैं खो जाता उन सितारों में
कितने खुश हैं वो
कितने चमक दार
शायद अपने जीवन साथी को आकर्षित कर रहे होंगे ...
दूर-दूर तक फैला इनका संसार
एक तारा बहुत चमक दार
शायद चिढा रहा हो अन्य तारों को
अपनी चमक से
काश मैं वहाँ होता
खेलता उनसे चोर सिपाही
और छिप जाता किसी बड़े की ओट में
सोचता मैं
मेरा ध्यान टूटा
कुत्तों की बढ़ती आवाज से
सियार भी बुलंद थे
शायद कोई चोर आया होगा
भूखा होगा ! नहीं
चोर भूखे नहीं होते
मैं लेटा यही सोच रहा होता
फिर सोचता किसी सुंदरी का आशिक होगा
चोरों की तरह आया होगा
और उसके कमरे में घुसने के लिए
सोई हुई प्रेमिका को जगा रहा होगा
कैसे अरमान होंगे उसके
पर ये कुत्ते उसके अरमानों पर पानी फेर रहे होते
कुत्तों की आवाज धीमी पड़ गयी
शायद वह सफल हो गया होगा
या फिर प्रेमिका के लिए लाया हुआ केक
कुत्तों को खिला रहा होगा
सोचता मैं
अचानक बिजली आई
और मेरा ध्यान टूटा
नीचे से मम्मी ने पुकारा
चले आओ
अपने कमरे में जाने के लिए मैं उठा
और देखा रोशनी बिखरी है चारों तरफ
कमरे में लगे बिस्तर पर
निढाल सा लेट गया
पंखे की आवाज , कानों को लगातार सुनाई दे रही थी
और कमरे के कोने में लगा मकडी का झाला
जिस पर मकडी टहल रही थी , सुबह सैर की तरह
मेरा मष्तिष्क कल्पना शून्य हो चुका था
नींद जैसी लग रही थी ..
लेकिन सपने गायब थे
बेचैनी में मैं बिस्तर से उठा
और छत की तरफ बढा
छत पर देखा , उन तारों को
उन तारों को जो अभी कुछ देर पहले
अपनी टिम टिमा हट से विचलित कर दे रहे थे
अब चेतना शून्य से दिख रहे हैं
कुत्ते कभी कभी रोने जैसी आवाजे निकालते
..सियार खामोश थे
सब बदल गया एक झटके में
क्या
मैं भी बदल गया
सोचता मैं ......