Friday 22 August 2008

कुत्ते भी इन्सानियत अपनाने लगे हैं

कुत्तों में भी

इन्सानी गुण आने लगे हैं


जाते थे पहले पतिदेव

साथ बाज़ार

लेकिन अब

कुत्ते साथ जाने लगे हैं


नौकर मन ही मन देता है

साहब को गालियॉ

देखा है, कुत्ते भी

मालिक को गुर्राने लगे हैं


करते हैं प्यार भरी बातें

झाड़ियों के पीछे, प्रेमीयुगल

कुत्ते तो

खुलेआम इश्क लड़ाने लगे हैं


प्यार में होती है मारपीट

प्रेमियों के बीच

कुतिया को लेकर, कुत्ते भी

एक दूसरे को काट खाने लगे हैं


युवतियों को देख लार टपकाते

देखा है बूढ़ों को

बुजुर्ग कुत्ते भी, जवान

कुतियों पर नज़र गड़ाने लगे हैं


इन हरकतों को देख

लगता है जैसे

कुत्ते भी

इन्सानियत अपनाने लगे हैं


- मनीष

9 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन..

tarunsansar.blogspot.com said...

class kavita karte ho yar

Nitish Raj said...

गजब बंधु बहुत बढ़िया...अच्छा लगा

Anil Pusadkar said...

bahut achhe

Lovely kumari said...

वाह मनीष जी मैंने साँपों की विवेचना की आपने कुतों की...चलो हमने पशुवत व्यवहार करना सीख लिया इसकी खुसी है .

नीरज गोस्वामी said...

क्या तुलना की है आपने कुत्ते और इंसान की वाह..."लड़ती है कुत्तों जैसे, कहलाती आदम जात है"
नीरज

vipinkizindagi said...

achchi post

डा. अमर कुमार said...

.

अरे भाई मनीष कुमार जी, इंसानों से तुलना करके कम से कम इन बेचारे कुत्तों का अपमान मत करो ।
आज तक इन कुत्तों को न तो झू्ठ बोलते, मक्कारी करते,जिसकी रोटी खाते हैं... उन्हीं को धोखा देते नहीं देखा है ।
इनकी स्वामीभक्ति के विषय में भी सुना ही होगा ।

हे ईश्वर, अगले जन्म में मुझे कुत्ता ही बनाना, इंसान बने रहने में तो बड़ा छल प्रपंच है, भाई !

कविता तो बहुत अच्छी है, किन्तु नज़रिया ....
ना ना, मैं बहुत बोल चुका... अब ना बोलूँगा !

sab kuch hanny- hanny said...

कुत्तों में भी

इन्सानी गुण आने लगे हैं










जाते थे पहले पतिदेव

साथ बाज़ार

लेकिन अब

कुत्ते साथ जाने लगे हैं

kutto se aapki achchhi pahchan hai. bura n maane sahi kaha aapne