Friday 15 August 2008

…ए बेटी रखती तोहके कुँवार

         भोजपुरी गाने अकसर फूहड़ ही  होते हैं, लेकिन इसे देख मेरी सोच बदल गयी।

              कुछ तो ऐसे हैं जो आँसू निकाल देते हैं।

4 comments:

Nitish Raj said...

तुम्हारे विचार से मैं सहमत हूं मनीष। दिल भारी कर दिया।

सतीश पंचम said...

शायद इस तरह के गीत लोगों के सामने नहीं आ पाते , और यही वह कारण है जो भोजपुरी गीतों को फूहड मानने पर विवश करते है (जो कि ज्यादातर हैं भी)।
अच्छी पेशकश।

मीत said...

बहुत बढ़िया है भाई. लेकिन "भोजपुरी गाने अकसर फूहड़ ही होते हैं" ये कहना कहाँ तक सही है, पता नहीं. खैर ये गीत सुन कर बहुत अच्छा लगा.

PREETI BARTHWAL said...

बहुत बढ़िया गीत सुनाया मनीष जी धन्यवाद