पिछले दिनों एक दोस्त की पेन ड्राइव में कुछ वीडियो सांग दिखे। जिसमें से कुछ बेहद पसंद आये, इनमें से कुछ गीत ऐसे हैं जो काफी लोक प्रिय हुए हैं जैसे
अरे रे मेरी जान है राधा ....

सपने में रात में ......

सखी मोरी पनघट ......

सुन यशोदा ......

आजा कलयुग में .......

ये सारे गीत हर घर में आज भी बड़े चाव से देखे और सुने जाते हैं। बूढ़े पुरनियों को ये गीत बहुत पसंद आ रहे हैं तो वही बच्चे इस गीत पर थिरक रहे हैं क्योंकि ये सारे गीत नन्हें मुन्हों पर ही फ़िल्माया गया है।
मुझे आज भी याद है वो रात, जब मैं बस से इलाहाबाद से निकल रहा था। कुछ दूर पर एक कार्यक्रम हो रहा था जिसे बच्चे प्रस्तुत कर रहे थे जिन्हे देखने के लिये ड्राइवर ने एक घंटे बस रोक रखी थी लेकिन किसी ने विरोध नही किया था सब अरे रे मेरी जान है राधा देख कर झूम रहे थे।
हमारे ऐसे बन्धु जो विदेश मे रह रहे हैं या ऐसे जो भारत में रह कर भी इसका लुत्फ़ न उठा पाये हों उनसे कहूंगा कि एक बार तो देख ही लें।
अगर गीत न मिल रहा हो तो मुझसे कहे मैं मेल करने को तैयार हूँ :) :)
विचार था कि यहाँ अपलोड कर ही दिया जाय लेकिन विचार पर एक और बड़े विचार ने ग्रहण लगा दिया।
अगर देखे हो तो ज़रा सा मुस्कुरा भर दीजिये। :) :) :)



3 comments:
मुस्करा भी दिये-और भारत यात्रा में सब सुन भी आये हैं...अरे मेरी जान है राधा पर तो थिरके भी थे. :)
अरे मनीषजी आपकी यही तो खूबी है कि आप किसी
भी संस्मरण को जीवित कर देतें हैं। बहुत खूब………
वाकई.. मजा आ गया ....
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