एक छोटा सा बच्चा एक नन्हीं सी चिड़िया को देखकर चिल्ला उठा – “मम्मी – मम्मी देखो चूहा”। उसकी माँ पहले तो जोर से हँसीं, फिर समझाते हुए प्यार से बोलीं – “बेटा ये चूहा नही है ये चिड़िया है, चिड़िया उड़ती है लेकिन चूहा नही उड़ता, चूहा ज़मीन पर चलता है, देखो-देखो चिड़िया उड़ गयी”।
बच्चा आश्चर्य से अपनी माँ की बातें सुनता रहा। साथ ही कुछ दूरी पर बैठे उसके पिता इस वार्तालाप को सुनते रहे और इन्होनें अपना बयान दिया – “साले यही सब देश के भविष्य हैं , छः साल के लौंडे अभी चूहा और चिड़िया मे फ़र्क नही जानते, हम जब इतने बड़े थे तो कई साँप नचा कर फेक दिया करते थे और ये नई पीढ़ी के बोझ साले , चींटी और काकरोच से डरते हैं। हे भगवान आने वाले समय मे क्या होगा”।
उन्होने एक गहरी साँस ली और अपनी दुनिया में खो गये।



5 comments:
ये क्या कह गए ....!!??
बहुत सही चित्र खींचा है दुखी बुजर्गों का..हा हा!!
........और अपनी दुनिया में खो गये।......
आज के बुजुर्ग समझते है की हम सही है लेकिन एसा नही है, वो आज के बच्चो को समझना ही नही चाहते, उन्होने एस धारणा बना ली है की बच्चो को कोई अनुभव नही, वो कुछ नही कर सकते, एक पिता अपने 6 साल के बच्चे को “साले यही सब देश के भविष्य हैं , छः साल के लौंडे अभी चूहा और चिड़िया मे फ़र्क नही जानते" , इस तरह बोलेंगे या बर्ताव करेंगे तो, बच्चे तो कुम्हार की मिट्टी जैसै है किस आकर में ढ़लेंगे ये तो सभी जानते है, आपने कम शब्दो में जो बेहतरीन चित्र खींचा है उसके लिए बधाई, आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद,
bahut acchi kahani hai
अच्छी कहानी लिखी है आपने।
स्वतंत्रतादिवस के अवसर पर बधाई
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