काफी दिनों की अनुपस्थिति के बाद फिर ब्लॉग की गलियों में झांकने का मन कर रहा है .
दो तीन जगह तो झाँक भी लिया . काफी बदलाव आ गया है .....
कई जगह "आंधी" आई ....बंदरों ने करामात दिखाई .... किसी ने मुंह की खाई ...और कुछ ने खोपडी खाई .
वैसे खोपड़ी खाने का चलन बहुत पुराना है
मैं हूँ न !!... :)
लेकिन काफी वीर भरे पड़े हैं ...जो मुझसे कई गुना असर डालते हैं खोपड़ी पर ...
खैर इसे छोड़ते हैं ...और अब हम लगते हैं अपने काम पर ...
भई ! कई खोपड़ी खानी बाकी है ......आप की भी खा सकते हैं ..अगर हो तो !!



2 comments:
आ गये, बालक. खुशी हुई पुनः देखकर. अब जारी हो जाओ. :)
आ गये, बालक. खुशी हुई पुनः देखकर. अब जारी हो जाओ.
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