Sunday, 11 May, 2008

पानी की एक बूँद !

  PA244190 Hellhole Trailhead

  चिलचिलाती धूप
  दूर तलक झिलमिलाते
  सूखे पेड़
  और फैली वीरानियां 


  सूखे तिनके भी
  तड़प उठते हैं
  कड़कते हुए
  इस झुलसती लू से 

  कटीली झाड़ियों से
  निहारता गिरगिट
  सिर को ऊपर नीचे
  करते हुए


  गोबर के बीच
  छिपा गुबरैला
  मल की गोलाइयां
  बना रहा है

  एक भटका पंक्षी
  तलाश रहा है
  हरे पत्तों की
  छाँव  

  palo santo tree

  इसी दौरान मेरा
  हलक सूख जाता है
  और
  मचल उठता है


  पानी की
  एक बूँद के लिए !

3 comments:

Udan Tashtari said...

हाय रे ये गर्मी!!!

बहुत यथार्थ चित्रण.

rakhshanda said...

बहुत सुंदर ,गर्मी और प्यास...

Keerti Vaidya said...

good job...

apka likhney ka andaaz bahut acha hai