काफी उत्साहजनक मूड था , कुछ नए विषय पर लिखने का . लेकिन एक हल्की सी खलल ने सब बंटाधार कर दिया .
विषय था भूतों पर कुछ रहस्यमई बाते उजागर करने का . लेकिन शायद भूतों को यह बात गंवारा नहीं हुई कि कोई लम्पट छाप हमारे बारे में लोगों को समझाए .
आखिर वही हुआ . जो होना था
अक्सर आधी रात को मैं अपने विचार ब्लाग में लपेटकर आपको सुपुर्द करता हूँ .ताकि कोई बाधा इसमे मिर्च न झोंक दे और आपकी आँखें इसे देखकर जल न उठें .
बहुत विचार करने के बाद मैंने भूतों से पंगा लेने का रिस्क उठाया था . लेकिन ......
आधी रात को जब इन अदृश्य चूतियों के बारे में जब लिखना शुरू किया तो एक महापुरुष अपनी तन्द्रा मिटाने मेरे सामने प्रगट हुए .
बोले यार नींद नहीं आ रही थी तो सोचा आपके यहाँ चलूँ ....ओह तो आप कुछ नया लिख रहे हैं ...अरे भूतों के बारे में ......वाह शुरुआत तो अच्छी है ....ज़रा गाने लगा दीजिये ...शकीरा के ....आप लिखिए ...... मैं बस देखूंगा ....नहीं ये लाइन ठीक नहीं है .......मेरी भी एक कहानी जोड़ दीजिये ......ऐसा ऐसा .....हाँ सही है......नहीं ये .......हाँ अब ठीक है ............
जब मैंने लेखन कार्य पूरा किया तो मुस्कुराए और कहे अब चलता हूँ नींद आ रही है .
और मैंने अपनी इस अनोखी कृति पर नज़र दौड़ाई तो नज़र दौड़ते दौड़ते थक गयी लेकिन कृति समाप्त नहीं हुई ...बीच बीच में झपकी भी आ जाती ..... मैंने सोचा कि ससुरे को नींद नहीं आ रही थी तो मेरी खोपडी पे मूत के चला गया . अब सब डीलीट करना होगा . इतने में फिर आकर बोले पोस्ट किया ...ज़रा देंखूं तो .....ज़रा पेशाब लग गयी थी ......अरे अभी तक पोस्ट नहीं किया ......कीजिए ....जल्दी कीजिए .....
मैंने किया . और जवाब मिला हाँ अब सही है ....अब चलता हूँ .....मैं मन ही मन ससुरे को गालियों से नवाज़ रहा था लेकिन वह अपनी मुस्कान से मुझे लज्जित कर रहा था .
मैंने हारकर इस मिलीजुली कोशिश से रचित रचना को आपके बीच रख दिया और आपने वही टिप्पणियाँ की जिसकी मुझे आशा थी .
आखिरकार भूतों ने सफलता पाई .....मेरी एकाग्रता भंग कर . और चिढ़ाते हुए कहा भी होगा .. कि हे मूर्ख ! दुबारा हम लोगों की दुनिया को दूसरे के बीच उजागर किया तो तेरी खैर नहीं...वैसे अब कोई तेरी बात सुनेगा भी नहीं ...ही ही ही ....
और उस अनोखी रात के बाद कुछ नया लिखने की बात भी नहीं सोच पाया . इतने दिनों बाद आज मौका मिला तो सोचा उसी दिन की एक झलक पेश की जाए .
लेखन कार्य में एकाग्रता कितनी महत्वपूर्ण है इसका एहसास है मुझे . शायद आपको भी हो .
आखिर दिमाग चाटू ब्लाग लिखकर दूसरे का कीमती समय क्यों बर्बाद किया जाय !!!




1 comments:
आखिर दिमाग चाटू ब्लाग लिखकर दूसरे का कीमती समय क्यों बर्बाद किया जाय !!!
आप खामखां अपराधबोध ग्रसित हैं और कितने ही यह करके रोज निकल जा रहे हैं और हम जैसे अनेकों तालियाँ बजा रहे हैं.
बड़ी दूर की चोट पहुँचाई ही बहुतों को आपने. :)
बधाई.
-----------------------------------
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.
शुभकामनाऐं.
समीर लाल
(उड़न तश्तरी)
Post a Comment